मेरे राम, कभी कबीर के दोहे में दिखे, तो कभी राष्ट्रपिता के भजनो में,
पर हमेशा दिखाई दिए तो अवध की उन गलियों मे।

कलयुग का यह वनवास कोर्ट-कचहरी में ऐसा उलझा की त्रेता युग के १४ वर्षो को भी पीछे छोड़ा गया।

बेरोज़गार की बिरयानी बड़ी सफ़ेद है।
कह दिया किसीने तो बेरोज़गार ने अगले दो दिन के मसाले उड़ेल दिए।

यह शायद देखनेवाले का नजरिया था, जो बिरयानी नहीं बल्कि बेरोज़गार को देख रहा था, वर्णा मसाले तो ठीक ही थे।